नई दिल्ली, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । भारत और जापान ने टोक्यो में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसमें आर्थिक, सुरक्षा, तकनीकी, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय सहयोग से जुड़े कुल 20 से अधिक दस्तावेज शामिल हैं। इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम आने वाले दशक के लिए साझा दृष्टिकोण पत्र और 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य तय करना रहा।
भारत-जापान 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दो दिवसीय दौरे पर आज टोक्यो पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शाम को अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा के साथ विस्तृत बैठक की, जो लगभग ढाई घंटे चली। इस दौरान द्विपक्षीय वार्ताएं हुईं, कई समझौतों का आदान-प्रदान हुआ और संयुक्त प्रेस वार्ता के बाद प्रधानमंत्री इशिबा ने मोदी के सम्मान में रात्रिभोज दिया।
भारत-जापान शिखर सम्मेलन पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक विशेष ब्रीफिंग में बताया कि इस यात्रा का मुख्य आकर्षण वे परिणाम हैं जो आने वाले दशक की नींव रखेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देंगे। दोनों प्रधानमंत्रियों ने अगले दस वर्षों के लिए साझा दृष्टिकोण पत्र को स्वीकार किया, जो एक रणनीतिक रोडमैप है। उन्होंने बताया कि इस दौरान दोनों नेताओं ने न केवल द्विपक्षीय विषयों पर बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर भी चर्चा की। यह स्पष्ट है कि वर्तमान भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच भारत-जापान संबंध अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में स्थिरता के स्तंभ बने हुए हैं।
मिस्री ने बताया कि जापान आज भारत का सबसे मूल्यवान और विश्वसनीय मित्र है। आत्मनिर्भर और विकसित भारत की यात्रा में जापान एक महत्वपूर्ण साझेदार है। संबंधों को नई ऊर्जा देने के लिए दोनों सरकारों ने आठ स्तंभों पर सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इनमें आर्थिक संबंध, आर्थिक सुरक्षा, गतिशीलता, प्रौद्योगिकी और नवाचार, पारिस्थितिकीय स्थिरता, स्वास्थ्य, जन-से-जन संपर्क और राज्यों तथा प्रांतों के बीच साझेदारी शामिल हैं।
विदेश सचिव ने बताया कि आपूर्ति शृंखला की मजबूती दोनों देशों के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। इस दिशा में आर्थिक सुरक्षा पहल शुरू की गई। इसके तहत पांच प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है- सेमीकंडक्टर, महत्त्वपूर्ण खनिज, औषधि, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी विशेषकर दूरसंचार और स्वच्छ ऊर्जा। इन क्षेत्रों में दोनों देशों ने केंद्रित सहयोग पर सहमति जताई है।
इस वार्ता में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर संवाद बढ़ाने को संस्थागत रूप देने का निश्चय किया है। दोनों देशों ने समसमायिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसके तहत सुरक्षा उद्योग, अनुसंधान एवं विकास, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों की रोकथाम पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा।
वार्ता में मानव संसाधन के क्षेत्र में कार्ययोजना तैयार की गई। इसके अंतर्गत दोनों देशों के बीच 5 लाख लोगों का द्विपक्षीय आदान-प्रदान होगा। विशेष रूप से भारत से 50 हजार कुशल और अर्धकुशल कर्मियों को अगले पांच वर्षों में जापान भेजा जाएगा।
पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में कई दस्तावेजों पर सहमति बनी। इसमें डिकार्बोनाइजिंग तकनीक, अपशिष्ट जल प्रबंधन, स्वच्छ हाइड्रोजन और अमोनिया पर शोध, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय तकनीक का सहयोग शामिल है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय हुआ। डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष अन्वेषण में संयुक्त परियोजनाओं की योजना बनी। चंद्रयान-5 मिशन में भारत और जापान मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
सांस्कृतिक और शैक्षिक सहयोग के तहत कला, संग्रहालय और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर समझौता हुआ। साथ ही, कूटनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर भी आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए ढांचा तय किया गया। अन्य उल्लेखनीय पहलुओं में आर्थिक सुरक्षा पहल की शुरुआत, एआई पहल का शुभारंभ, छोटे और मध्यम उद्यम मंच की स्थापना और सतत ईंधन पहल को आगे बढ़ाना शामिल है। साथ ही भारत और जापान के राज्यों और प्रांतों के बीच उच्चस्तरीय आदान-प्रदान की योजना भी बनाई गई।
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(Udaipur Kiran) / अनूप शर्मा
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